लेंसकार्ट के संस्थापक पीयूष बंसल की सफलता की कहानी
भारतीय स्टार्टअप जगत में सफलता की मिसाल पेश करने वाले उद्यमी पीयूष बंसल की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले पीयूष ने अपनी मेहनत, नवाचार और ग्राहक-केंद्रित सोच से आईवेयर इंडस्ट्री को पूरी तरह बदल दिया। आज लेंसकार्ट भारत का प्रमुख आईवेयर ब्रांड है, जो लाखों लोगों की जिंदगी को आसान बना रहा है। आइए जानते हैं उनकी सफलता की इस प्रेरणादायक यात्रा को।
पीयूष बंसल का जन्म 26 अप्रैल 1985 को नई दिल्ली में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता ने शिक्षा, अनुशासन और ईमानदार मेहनत पर जोर दिया, जो उनकी सफलता की नींव बने। बचपन से ही पीयूष जिज्ञासु थे; वे तकनीक और गणित में रुचि रखते थे और समस्याओं को हल करने में आनंद लेते थे। स्कूल के शिक्षक उन्हें एक होनहार छात्र मानते थे, जो चीजों को सरल बनाने में माहिर थे।
शिक्षा के क्षेत्र में पेयूष ने कनाडा की मैकगिल यूनिवर्सिटी से 2006 में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इस दौरान उन्हें वैश्विक व्यापार ट्रेंड्स, आधुनिक तकनीक और स्टार्टअप कल्चर का गहरा अनुभव मिला। उन्होंने देखा कि विदेशों में कैसे तकनीक के जरिए ग्राहक अनुभव को प्राथमिकता दी जाती है, जिसने उन्हें भारत में कुछ ऐसा ही करने की प्रेरणा दी।
ग्रेजुएशन के बाद पीयूष बंसल ने अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट में प्रोग्राम मैनेजर के रूप में काम किया। यहां उन्होंने उत्पाद विकास, टीमवर्क और ग्राहक जरूरतों को समझने का अनुभव प्राप्त किया। उन्होंने सीखा कि सफल कंपनियां वास्तविक समस्याओं को हल करने पर फोकस करती हैं। हालांकि, अच्छी नौकरी होने के बावजूद, पीयूष का मन भारत में कुछ बड़ा करने का था। वे वापस लौट आए और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के साथ प्रयोग शुरू किए।
भारत लौटने पर पीयूष बंसल को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सीमित संसाधनों के साथ छोटी टीम बनाना, अनिश्चितता से जूझना और शुरुआती असफलताएं झेलनी पड़ीं। लेकिन इन असफलताओं ने उन्हें भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरतों को बेहतर समझने में मदद की। उन्होंने आईवेयर मार्केट में एक बड़ी कमी देखी: चश्मा खरीदना महंगा, समय लेने वाला और सीमित विकल्पों वाला था। दुकानों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे।
इसी कमी को दूर करने के लिए 2010 में पेयूष ने लेंसकार्ट की स्थापना की। उनका मिशन था आईवेयर को सुलभ और किफायती बनाना। शुरू में यह एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म था, जहां ग्राहक आसानी से फ्रेम्स चुन सकते थे और क्वालिटी लेंस कम दामों पर पा सकते थे। भारत में ई-कॉमर्स के उभरते दौर में लेंसकार्ट ने हाइब्रिड मॉडल अपनाया – ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स का संयोजन – ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा जा सके।
पीयूष बंसल के नेतृत्व में लेंसकार्ट ने आईवेयर इंडस्ट्री में क्रांति ला दी। कंपनी ने कई नवाचार किए, जैसे:
- घर पर मुफ्त आई चेकअप, जहां ट्रेंड प्रोफेशनल्स आते हैं।
- घर पर ट्रायल: कई फ्रेम्स डिलीवर करवाकर ट्राय करने की सुविधा।
- स्टाइलिश फ्रेम्स और लेंस की बड़ी वैरायटी, अलग-अलग कीमतों पर।
- तकनीक का इस्तेमाल: एआई-बेस्ड फेस डिटेक्शन और वर्चुअल ट्राय-ऑन टूल्स।
- किफायती दाम, ताकि लोग एक से ज्यादा चश्मे आसानी से खरीद सकें।
इन फीचर्स ने ग्राहकों का विश्वास जीता और लेंसकार्ट को भारत का प्रमुख ब्रांड बना दिया। कंपनी ने वैश्विक निवेशकों से फंडिंग जुटाई, जिससे स्टोर्स, तकनीक और प्रोडक्ट्स का विस्तार हुआ। आज लेंसकार्ट के भारत भर में सैकड़ों स्टोर्स हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मौजूदगी है। यह भारत के सबसे मूल्यवान स्टार्टअप्स में से एक है।
पीयूष बंसल की सफलता सिर्फ बिजनेस तक सीमित नहीं। वे शार्क टैंक इंडिया में निवेशक के रूप में नजर आए, जहां उनकी शांत स्वभाव, ईमानदार फीडबैक और सलाह ने उन्हें लोकप्रिय बनाया। वे स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं और युवा उद्यमियों को ग्राहक जरूरतों, टीम बिल्डिंग और वित्तीय अनुशासन पर मार्गदर्शन देते हैं। वे कहते हैं कि असफलताएं सीढ़ियां हैं और असली सफलता ग्राहकों की समस्या हल करने से आती है।
पीयूष बंसल की कहानी युवा उद्यमियों के लिए प्रेरणा है। दिल्ली के एक साधारण लड़के से लेकर लेंसकार्ट के सीईओ तक का सफर दर्शाता है कि मेहनत, नवाचार और ग्राहक फोकस से कुछ भी संभव है। उनका विजन है हर भारतीय घर में आई केयर को सुलभ बनाना और वैश्विक स्तर पर विस्तार करना। पेयूष साबित करते हैं कि सपने बड़े हों तो रास्ते खुद बन जाते हैं।


