शार्क टैंक के ‘शार्क’ अनुपम मित्तल की अनसुनी संघर्षपूर्ण यात्रा: 5 जीवन बदल देने वाले सबक
नई दिल्ली, 12 जनवरी 2026: अनुपम मित्तल आज भारत के सबसे चर्चित उद्यमियों में से एक हैं। Shaadi.com के संस्थापक और Shark Tank India के प्रमुख जज के रूप में वे लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। शार्क टैंक इंडिया के पांच सीजन में अब तक 436 डील्स के जरिए 388 करोड़ रुपये की निवेश प्रतिबद्धता के साथ वे न केवल निवेशक हैं, बल्कि भारत की स्टार्टअप क्रांति के प्रमुख चेहरों में शुमार हो चुके हैं।
लेकिन उनकी यह चमकदार सफलता आसान रास्ते से नहीं आई। डॉट-कॉम क्रैश में सब कुछ गंवाने से लेकर साहसिक फैसलों तक—उनकी कहानी जोखिम, असफलता और दृढ़ संकल्प से भरी है। यहां हम उनके जीवन से निकले 5 सबसे प्रभावशाली सबकों को सामने ला रहे हैं, जो आपकी सोच और करियर को नई दिशा दे सकते हैं।
सबक 1: ब्रांड नाम पर सारी जमा-पूंजी लगाने का साहस अनुपम मित्तल की सफलता की शुरुआत Shaadi.com से हुई। शुरू में उन्होंने इसे Sagaai.com नाम से लॉन्च किया था, लेकिन उन्हें एक ऐसा नाम चाहिए था जो लोगों के दिमाग में तुरंत बस जाए। उनकी नजर Shaadi.com डोमेन पर पड़ी, जिसके लिए विक्रेता ने 25,000 डॉलर (तब करीब 20 लाख रुपये) मांगे।
उस समय यह उनकी कंपनी की लगभग पूरी बचत थी—केवल 30,000 डॉलर। कई लोगों के लिए यह पागलपन लगता, लेकिन अनुपम ने इसे अपना सबसे स्मार्ट फैसला बताया। आज Shaadi.com भारत का सबसे बड़ा मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म है।

यह सबक सिखाता है कि मजबूत, कैटेगरी-डिफाइनिंग ब्रांड नाम में निवेश करना कभी-कभी सबसे बड़ा दांव होता है, जो लंबे समय में मार्केटिंग लागत घटाता है और ब्रांड वैल्यू बनाता है।
सबक 2: ‘थोड़ा बेहतर’ प्रोडक्ट कभी नहीं जीतता अनुपम मित्तल युवा उद्यमियों को चेतावनी देते हैं—अगर आप मौजूदा बाजार में सिर्फ “थोड़ा बेहतर” प्रोडक्ट या मार्केटिंग लेकर उतरेंगे, तो सफलता मुश्किल है।
वे टूथपेस्ट या टूथब्रश का उदाहरण देते हैं—ग्राहक स्थापित ब्रांड नहीं छोड़ते, क्योंकि वे भरोसे और सुरक्षा को तरजीह देते हैं। असली जीत के लिए या तो 10 गुना बेहतर समाधान लाओ या ऐसी गहरी अंतर्दृष्टि जो बाजार के नियम ही बदल दे।
सतही सुधारों से बचें, असली इनोवेशन पर फोकस करें।
सबक 3: सफलता कभी सीधी नहीं होती—25 साल में करोड़पति बने, फिर सब गंवाया अनुपम की जिंदगी उतार-चढ़ाव से भरी है। किशोरावस्था में कई बिजनेस शुरू किए, लेकिन नुकसान हुआ। महज 25 साल की उम्र में वे करोड़पति बन गए, लेकिन 2001 के डॉट-कॉम क्रैश में सब कुछ खो दिया।
बाद में 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट में 25 मिलियन डॉलर का साइन किया निवेश सौदा रद्द हो गया, कर्मचारियों को निकालना पड़ा और कई प्रोजेक्ट बंद हुए।
उनका मानना है—जीवन और बिजनेस की लाइन कभी आगे, कभी पीछे; कभी ऊपर, कभी नीचे जाती है। कामयाब और असफल लोगों में फर्क सिर्फ दृढ़ता (perseverance) का होता है। असफलता सामान्य है; महत्वपूर्ण है बार-बार उठना।
सबक 4: उद्यमिता का ग्लैमरस चेहरा और उसकी कड़वी हकीकत बाहर से उद्यमिता चमक-दमक भरी लगती है, लेकिन अंदर से बेहद कठिन। अनुपम इसे “जीवन भर हर दिन दांत निकालने जैसा” बताते हैं।
वे कहते हैं—सामान्य जिंदगी में संघर्ष होता है, उद्यमिता चुनने पर वह डबल-ट्रिपल हो जाता है। वे खुद को इतना धकेलते हैं कि हर दो साल में चोट लगने से अस्पताल पहुंच जाते हैं।
उद्यमिता के लिए ऊंची दर्द सहनशीलता जरूरी है। यह स्वास्थ्य, रिश्तों और निजी सुकून पर भारी पड़ सकती है। अगर इस रास्ते पर चलना है, तो मानसिक रूप से तैयार रहें—त्याग अनिवार्य है।
सबक 5: जुगाड़ और जिज्ञासा से आगे—सफलता का असली ईंधन ‘मकसद’ है जिज्ञासा और जुगाड़ शुरुआत के लिए अच्छे हैं, लेकिन बड़ी कंपनी बनाने के लिए गहरा मकसद (Purpose) चाहिए।
अनुपम ने एक समय खुद से पूछा—वे Shaadi.com क्यों चला रहे हैं? इसके बाद उन्होंने अपनी कंपनी People Group का मकसद तय किया—“टुगेदर” यानी लोगों को साथ लाना।
यह स्पष्ट मकसद मिलने के बाद कंपनी नई ऊंचाइयों पर पहुंची। बिना मकसद के लंबे समय तक कड़ी मेहनत नहीं की जा सकती।
अपने बिजनेस का “क्यों” ढूंढें। जब मुश्किलें आएंगी, यही मकसद आपको और आपकी टीम को आगे बढ़ने की ताकत देगा।
निष्कर्ष अनुपम मित्तल की कहानी बताती है कि सफलता सिर्फ अच्छे आइडिया या किस्मत से नहीं मिलती—यह साहसिक फैसले, गहरी सोच, असफलताओं से उबरना, कठिन सच्चाइयों को सहन करना और मजबूत मकसद से जुड़ी होती है।
यह “नए भारत” की उद्यमी भावना का प्रतीक है, जहां जोखिम लेना और खुद पर भरोसा रखना सफलता की कुंजी है।
आपकी जिंदगी में कौन सा सबक सबसे ज्यादा लागू होता है? अपनी कहानी कमेंट में जरूर शेयर करें!


